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महत्वपूर्ण नियम एवं शर्तें

महत्वपूर्ण नियम एवं शर्तें

महत्वपूर्ण नियम और शर्तें (एमआईटीसी) चालू खाता

“चालू खाता” :

  • यह मांग जमा का एक रूप है, जिसका अर्थ होता है – खाते में शेष राशि या किसी विशेष सहमत राशि को किसी भी समय निकालने की अनुमति प्रदान करना तथा इसमें वे अन्य जमा खाते भी शामिल होते हैं, जो न तो बचत जमा हैं और न ही सावधि जमा ।

 

खाता खोलना :

  • खाता खोलने की औपचारिकताएं बैंक की नीतियों द्वारा नियंत्रित होती हैं तथा यह समय-समय पर संशोधित की जा सकती है । बैंक की आवश्यकतानुसार ग्राहकों को समय-समय पर बैंक की तसल्ली के लिए निर्धारित दस्तावेजों के सेट सहित विधिवत भरे हुए आवेदन-पत्र बैंक में जमा करने की आवश्यकता पड़ सकती है ।
  • एक व्यक्ति या फर्म के पास केवल एक खाता होना चाहिए तथा उन्हें किसी अन्य शाखाओं/बैंकों में रखे गए अन्य खातों के ब्यौरे की जानकारी भी देनी चाहिए ।
  • बैंकिंग प्रणाली से क्रेडिट सुविधाओं का लाभ लेने वाली संस्थाओं का चालू खाता खोलते समय बैंक, भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा गठित सीआरआईएलसी (बृहत ऋण पर सूचना के केन्द्रीय आधान) में उपलब्ध जानकारी का उपयोग कर सकता है । बैंकों को विशेष रूप से एनपीए स्तर में कमी लाने के लिए ऋण अनुशासन देखने के साथ-साथ ग्राहक की घोषणा के अनुसार, वह जिस बैंक की ऋण सुविधाओं का लाभ ले रहा है, वहाँ से केवल एनओसी ही नहीं लेना चाहिए बल्कि इस संबंध में समुचित सावधानी भी बरती जानी चाहिए ।

 

खाते की शैली

  • यह खाता इन नामों पर खोला जा सकता है ए) किसी व्यक्ति के अपने नाम पर; बी) संविदात्मक क्षमता वाले दो या दो से अधिक व्यक्ति अपने नामों पर एक संयुक्त खाता खोल सकते हैं । सी) एकल- स्वामित्व फर्म साझेदारी फर्म, लिमिटेड कंपनियां, हिंदू अविभाजित परिवार फर्म, ट्रस्ट, निष्पादक / प्रशासक, सरकारी / अर्ध-सरकारी / स्थानीय निकाय, संघ, सोसाइटी, परि‍समापक, रिसीवर, मालिक की ओर से एजेंट, कंपनी के नाम पर लेखा (और समय-समय पर संबंधित सेवाओं का लाभ उठाया जाता है), साझेदारी फर्म, ट्रस्ट, एसोसिएशन या अन्य इकाई संबंधित संस्थाओं के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता (ओं) द्वारा संचालित की जाएगी जैसा खाता खोलने के समय या इन नियमों और शर्तों के अनुसार अलग-अलग इकाई द्वारा प्रस्तुत एओएफ / संकल्प में निर्दिष्ट है । इस प्रकार की कंपनी के प्राधिकृत हस्ताक्षरकर्ता में परिवर्तन, उनसे आवश्यक प्राधिकरण / संकल्पों को यथोचित रूप से प्रस्तुत करने एवं बैंक की तसल्ली के पश्चात ही मान्य होंगे ।

 

खाते का संचालन

  • संयुक्त खाता खोलते समय, खाते के संचालन से संबद्ध स्पष्ट अधिदेश प्रदान करना चाहिए। ऐसे अधिदेश (i) समस्त व्यक्तियों द्वारा संयुक्त रूप से संचालित किए जा सकते हैं । (ii) दो या दो से अधिक व्यक्तियों द्वारा संयुक्त रूप से संचालित किए जा सकते हैं । (iii) उनमें से किसी एक के द्वारा संचालित किया जा सकता है । (iv) दोनों में से किसी एक या उत्तरजीवी द्वारा संचालित किया जा सकता है । (v) पूर्व या उत्तरजीवी (ओं) द्वारा संचालित किया जा सकता है । हालांकि, यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि यह अधिदेश खाता धारकों द्वारा दिए गए “सभी के साथ संयुक्त रूप से किए जाने वाले संचालन” को छोड़कर खाते में सामान्य / आम लेनदेन के लिए मान्य है । किसी विशेष लेनदेन के लिए सभी संयुक्त खाता धारकों की सहमति आवश्यक होती है । राशि जमा करना एवं किसी जमा खाते से धन निकालना अथवा किसी मियादी जमा के परिपक्व होने या परिपक्वता के पश्चात राशि को निकालना, सामान्य लेनदेन के अंतर्गत माना जाता है । खाता खोलना, खाता बंद करना, जमा के एवज में ऋण / ओवरड्राफ्ट लेना, मियादी जमा का पूर्व परिपक्व भुगतान, अग्रिम के लिए प्रति‍भूति देना और / या अग्रिम के समायोजन के पश्चात प्रतिभूति की सुपुर्दगी असाधारण लेनदेन है, जिसके लिए सभी जमाकर्ताओं की सहमति आवश्यक है ।

 

अधिदेश की वैधता :

  • इस प्रकार, “हम में से किसी एक” या “हम में से कोई दो (दो से अधिक वाले में)” के खाते में संचालन की अनुमति देने का अधिदेश किसी भी संयुक्त खाता धारकों की मृत्यु पर समाप्त हो जाएगा । लेकिन अगर अधिदेश खाते में “धारक या उत्तरजीवी” या “दोनों में से एक या उत्तरजीवी” खाते में परिचालन की अनुमति देता है, तो खाते में शेष राशि संयुक्त खाता धारकों में से एक की मृत्यु के बाद उत्तरजीवी को भुगतान की जा सकती है। तथापि, जमा के एवज में ऋण और / या परिपक्वता से पूर्व मियादी जमा का भुगतान, इस प्रकार के अधिदेश द्वारा कवर नहीं किया जाता है ।

 

अन्य सुपुर्दगी चैनल :

  • हमारे एटीएम कार्ड की सेवाओं का लाभ कहीं भी और किसी भी समय लिया जा सकता है । ग्राहक अपने कार्यालय / घर से अपनी सुविधानुसार परेशानी मुक्त बैंकिंग के लिए हमारे इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग सेवाओं का लाभ ले सकते हैं ।

 

आवश्यक न्यूनतम शेष :

  • सामान्य चालू खाते के लिए 5000 रुपये की न्यूनतम त्रैमासिक औसत शेष राशि बनाए रखना आवश्यक है । इस संदर्भ में तिमाही की परिभाषा – ‘जनवरी से मार्च, अप्रैल से जून, जुलाई से सितंबर और अक्टूबर से दिसंबर तक’ है । आवश्यक न्यूनतम औसत शेष राशि को बनाए रखने में चूक होने के परिणाम स्वरूप समय-समय पर निर्धारित सेवा शुल्क की उगाही की जाएगी।
  • मूल्य वर्धित सेवाओं के साथ विशेष चालू खाता उत्पाद के लिए जो न्यूनतम मासिक औसत शेष राशि बनाए रखने की आवश्यकता होती है, वह उसके चयनित प्रकार पर निर्भर करता है एवं यह रु.50000 से रु.500000 तक के हो सकते हैं।

 

नकद एवं चेक जमा :

  • सामान्यतः चालू खातों में सभी जमाएँ जमा-पर्ची के साथ होनी चाहिए, जो जमाकर्ताओं को प्रदान किया जाता है । इन जमाओं के लिए अलग जमा-पर्ची का उपयोग किया जाना चाहिए, यथा: ए) नकद,  बी) उस शाखा से चेक आहरि‍त किया गया हो जहाँ पर खाते का हिसाब रखा जाता है,  सी) बैंक के किसी अन्य शाखा से चेक आहरित किया गया हो,  डी)  स्थानीय समाशोधन बैंकों से आहरित चेक,  ई) बाहर की शाखाओं / बैंकों से चेक,  एफ) बिल एवं अन्य कलेक्शन आइटम ।  ग्राहकों द्वारा चेक को वसूली के लिए सौंपने से पूर्व, अपने खाते में राशि क्रेडिट करने के लिए जमा किए जानेवाले चेक को क्रॉस करना आवश्यक है ।
  • किसी खाते में क्रेडिट के लिए धन-प्रेषण विशेष परिस्थितियों में पत्र द्वारा किया जा सकता है । प्रेषक को उनका नाम एवं खाता संख्या इंगित करना चाहिए, जिनके लिए क्रेडिट अभीष्ट है ।

 

चेक बुक जारी करना :

  • बैंक द्वारा प्रदत्त बैंक के मुद्रित चेक के प्रारूप में ही केवल चेक का आहरण किया जाना चाहिए । अन्यथा,  बैंक को आहरण हेतु प्रदत्त चेक का भुगतान करने से इनकार करने का पूर्ण अधिकार है ।
  • प्रत्येक चेक बुक के साथ एक चेक बुक के लिए मुद्रित प्रार्थना-पत्र अवश्य उपलब्ध कराया जाना चाहिए । एमआईसीआर चेक बुक 3 रुपये लागत वाली प्रति चेक लीफ के हिसाब से जारी की जाएगी । व्यक्तिगत चेक बुक उसके मांग करने पर जारी किया जाएगा तथा इसे बैंक के रिकॉर्ड में उपलब्ध पते पर डाक के माध्यम से भेजा जाएगा।
  • जमाकर्ता को उपलब्ध कराई गई चेक बुक की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा उन चेक पृष्ठों की चोरी, दुरुपयोग व धोखाधड़ीपूर्वक प्रयोग से बचाने की ज़िम्मेदारी स्वयं जमाकर्ता की ही है ।
  • केवल सीटीएस -2010 मानकों के अनुरूप चेकों का उपयोग किया जाए तथा जारी किए गए चेक / ईसीएस अधिदेश को सकारने हेतु खाते में धनराशि की पर्याप्तता सुनिश्चित की जाए । समाशोधन में आए हुए चेकों की वापसी पर बैंक द्वारा समय-समय पर निर्धारित किए अनुसार जुर्माना लगेगा ।
  • जब तक कि कोई उपयुक्त कारण न हो, बैंक अपने विवेकानुसार, एक समय में एक से अधिक चेक बुक प्राप्त करने के अनुरोध को अस्वीकार कर सकता है ।

चेकों द्वारा परिचालन:

  • जिस चेक को किसी भी तरह बदला गया है, उस चेक के भुगतान को अस्वीकृत करने का अधिकार बैंक के पास सुरक्षित है जब तक कि चेक में किए गए परिवर्तन को चेक काटनेवाले के पूर्ण हस्ताक्षर द्वारा प्रमाणीकृत नहीं किया जाता ।
  • तारीख, प्राप्तकर्ता का नाम और चेक पर राशि स्पष्ट रूप से अमिट स्याही में इस तरह से लिखी जाए कि बाद में किसी भी तरह का कोई परिवर्तन न किया जा सके अथवा अन्य शब्दों या आंकड़ों को जोड़ा न जा सके ।
  • कटे-फटे, उत्तर दि‍नांकि‍त और अनियमित अथवा असामान्य रूप से काटे गए चेक, साथ ही असंगत मैटर वाले चेकों का भी, भुगतान किए जाने से इनकार किया जा सकता है। चेक पर चेक धारक के हस्ताक्षर एक समान हों जोकि बैंक में चेक – धारक द्वारा नमूने के तौर पर उपलब्ध कराए गए हस्ताक्षर से मेल खाने चाहिए ।
  • उत्तर दि‍नांकि‍त चेक, अर्थात प्रेजेंटेशन की तारीख के बाद की तिथि वाले चेक का भुगतान नहीं किया जाएगा । जारी किए जाने की तारीख से 3 महीने की समाप्ति के बाद प्रस्तुत किए गए चेक को अप्रचलि‍त अथवा गतावधि चेक माना जाएगा और इसका भुगतान अस्वीकार कर दिया जाएगा ।
  • विशेष व्यवस्थाओं के अतिरिक्त भुगतान किए गए चेक वापस नहीं किए जाएंगे ।
  • खातों में जमा राशि व जितनी राशि प्राप्त की जानी है केवल उतनी ही राशि हेतु चेक आहरित किए जाएं । किसी भी परिस्थिति में किसी भी ग्राहक को यह नहीं मानना चाहिए कि उन्हें ओवरड्राफ्ट सुविधाएं अनुमत की जाएंगी अथवा उगाही (रियलाइजेशन) के दौरान चेक के सम्मुख आहरण अनुमत किए जाएंगे ।
  • यह भी स्पष्ट रूप से समझा जाए कि ग्राहक द्वारा जारी किए गए चेक, जो किसी भी कारण से खाते में डेबिट बैलेंस का कारण बनेंगे, बैंक द्वारा इसे एक निहित अनुरोध और ग्राहक द्वारा बैंक को दिए गए प्राधिकरण के रूप में समझा जाएगा तथा ऐसे अस्थायी डेबिट / ओवरड्राफ्ट और चेक के पास होने पर बैंक के विवेकाधिकार पर या इसके विपरीत या ग्राहक के अनुरोध पर, इसके परिणामस्वरूप खाते में होने ले ओवरड्राफ्ट सुविधा को नियमित व्यवस्था के रूप में नहीं माना जाए ।

वसूली हेतु चेक व बिल

  • जमा हेतु प्रस्तुत सभी चेकों व अन्य लिखतों को रेखांकित किया जाए । समाशोधन बैंकों पर चेक स्थानीय समाशोधन गृह के नियमों के अनुसार वसूल किए जाएंगे ।
  • बैंक ग्राहकों की ओर से चेक, हुंडी, बिल, ड्राफ्ट, वेतन और पेंशन बिल आदि कार्य करता है। स्थानीय रूप से देय चेक, डिमांड ड्राफ्ट, बिल इत्यादि, शीघ्र भेजे जाएँ ताकि यदि संभव हुआ, तो उन्हें उसी दिन वसूल किया जा सके ।  स्थानीय बैंकों के चेक, ड्राफ्ट इत्यादि नि:शुल्क एकत्रित किए जाएंगे ।
  • यदि वसूली हेतु लिए गए लिखत नकार और लौटा दिए जाते हैं, तो बैंक, ग्राहक जिसने लिखत प्रस्तुत किया है को अगले दिवस तक इस प्रकार के अनादर हेतु नोटिस नहीं देता है। बैंक के पास खाते में जमा की गई सभी मदों हेतु खाता डेबिट करने का अधिकार होगा, जो बाद में वापस कर दिया जाता है या जिसका भुगतान नहीं किया जाता है।
  • वसूली हेतु प्रस्तुत तथा किसी खाते में जमा किए गए चेक, ड्राफ्ट इत्यादि को तब तक आहरित न किया जाए जबतक कि उनकी उगाही / (रियलाइजेशन) नहीं की जाती । यह स्पष्ट रूप से समझा जाए कि भले ही खाते के विवरण में ऋण प्रविष्टियां की गई हों, ऐसे ऋण पूरी तरह से या आंशिक रूप से वसूली के तहत चेकों अथवा अन्य लिखतों से किए जाएं इसलिए इस तरह से आकलित राशियां आहरण हेतु उपलब्ध नहीं होतीं जब तक कि इस तरह के चेक और लिखतों की उगाही / (रियलाइजेशन) नहीं की जाती।   किसी भी परिस्थिति में ग्राहक यह न माने कि वसूली के दौरान चेक के एवज़ में आहरण अनुमत किया जाएगा ।
  • बैंक द्वारा वसूली / खरीदी / परक्रामण के लिए स्वीकृत चेक व ड्राफ्ट तथा अन्य लिखत, वसूली हेतु उन शाखाओं या बैंक / अन्य बैंकों के पास अग्रेषित किए जाएंगे, जिस पर खाता धारक की जोखिम और जिम्मेदारी पर लिखत पूरी तरह देय हों । वसूली हेतु बैंक अपनी पसंद के किसी भी बैंक की सेवाओं का उपयोग करने के लिए स्वतंत्र होंगे तथा इस हेतु नियोजित बैंक वसूली के लिए खाताधारक के लिए एजेंट होगा ।
  • बैंक अपने विकल्प पर या एजेंट अपने विवेकाधिकार पर सामान्य या पंजीकृत डाक द्वारा खाते धारक की एकमात्र जोखिम और जिम्मेदारी पर लिखतों को वसूली हेतु भेजेगा । इस तरह के प्रेषण के दौरान लिखतों के किसी भी नुकसान हेतु बैंक जिम्मेदार नहीं होगा ।
  • बैंक बसूली हेतु भेजे गए लिखतों के बदले में एजेंसी बैंक से नकद भुगतान लिखतों अथवा अधिदेशों को स्वीकार कर सकता है, ऐसे अधिदेश या विनिमय लिखत पूरी तरह से खाताधारक की एकमात्र जोखिम और जिम्मेदारी पर वसूल किए जाएंगे ।

पारगमन में लिखतों का गुम हो जाना

  • ग्राहकों से अनुरोध है कि वे चेक, ड्राफ्ट और अन्य मूल्यवान लिखत पंजीकृत डाक द्वारा भेजें ताकि वे पारवहन में खो न जाएं अथवा चोरी न हो जाएं । खाता धारक द्वारा जारी किए गए चेक के गुम जाने, चोरी हो जाने की स्थिति में भुगतान रुकवाने के लिए बैंक, ग्राहक के अनुदेशों को पंजीकृत करेगा ।
  • चेक पारवहन में या समाशोधन प्रक्रिया में या भुगतानकर्ता बैंक की शाखा में गुम हो जाने की स्थिति में, बैंक तुरंत ही इस आशय की सूचना ग्राहक को देगा ।
  • बैंक, अदाकर्ता बैंक / शाखा से संपर्क करके चेक संप्राप्तियों को प्राप्त करने हेतु आवश्यक कार्य करेगा और चेक उगाही (रियलाइजेशन) में किसी भी प्रकार की संभावित देरी के बारे में ग्राहक को सूचित किया जाएगा ।
  • बैंक ग्राहक से डुप्लिकेट चेक प्राप्त करने का अनुरोध करेगा और बैंक इस संबंध में किए गए उचित व्यय की प्रतिपूर्ति करेगा । इसके अलावा बैंक  देरी / असामान्य देरी के लिए निमन्वत ब्याज का भुगतान करेगा:
  • आउटस्टेशन चेकों की वसूली की स्थिति में यथास्थिति 7/10/14 दिनों से अधिक की विलंबावधि हेतु बचत बैंक दर ।
  • 14 दिनों से अधिक विलंब की स्थिति में, संबंधित अवधि की सावधि जमा पर लागू दर पर ब्याज का भुगतान किया जाएगा ।
  • असाधारण देरी के मामले में (अर्थात 90 दिनों से अधिक की देरी की स्थिति में), ब्याज का भुगतान इसी अवधि की मीयादी जमा दर से 2% अधिक की दर पर किया जाएगा ।
  • वसूली के तहत यदि चेक ग्राहक के ओवरड्राफ्ट / ऋण खाते में जमा किया जाना है तो ब्याज का भुगतान ऋण खाते पर लागू ब्याज़ दर पर किया जाएगा । असाधारण देरी के लिए, ऋण खाते पर लागू दर से 2% अधिक की दर पर ब्याज का भुगतान किया जाएगा ।
  • उपर्युक्त अनुसार ब्याज का भुगतान केवल भारत के भीतर वसूली हेतु भेजे गए लिखतों के लिए लागू होगा ।

खाता विवरण

  • खाता धारकों को खाता विवरण मासिक आधार पर प्रदान किया जाएगा। ग्राहकों के अनुरोध पर छोटे अंतराल पर भी खाता विवरण प्रयोज्य शुल्क, यदि कोई हो, भुगतान के अध्यधीन प्रदान किया जाएगा।
  • जब तक कि ग्राहक अपने खाते के विवरण में उनके द्वारा पाई गई किसी तरह की विसंगति के बारे में तुरंत बैंक को सूचित नहीं करेंगे तब तक यह समझा जाएगा कि उनको खाता विवरण में मिली प्रविष्टियाँ सही है। यह ग्रहाक के लिए भी आवश्यक है कि खाता विवरण में पाये गए किसी तरह की गलत क्रेडिट प्रविष्टियों की जानकारी यथाशीघ्र बैंक के सज्ञान में लाएं। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो इसे ग्राहक की ओर से अनुबंध का उलंघन समझा जाएगा और इस मामले को तदानुसार निपटाया जाएगा। विवरणियाँ सिस्टम से सृजित होती है तथा इनपर हस्ताक्षर की आवश्यकता नहीं होती है।

खाता विवरण की प्रतिलिपि

  • यदि खाता विवरण गलत हो या कहीं गुम हो जाए तो ग्राहक के अनुरोध पर नई प्रविष्टियां सहित विवरण की प्रतिलिपि निर्धारित शुल्क लेकर दी जाएगी। यदि किसी पूर्व अवधि के लिए खाते की प्रति आवश्यक है तो प्रतिलिपि बनाने के लिए निर्धारित अनुपातिक प्रभार अतिरिक्त शुल्क के रूप ली जाएगी।
  • खाताधारक को पासबुक / खाता विवरण में प्रविष्टियों की जांच सावधानीपूर्वक करनी चाहिए और त्रुटियों / चूकों, विसंगतियों / अनधिकृत / गलत प्रविष्टियों की जानकारी बैंक को देनी चाहिए। पासबुक / खाता विवरण प्राप्त होने के बाद यदि उचित समय के भीतर बैंक को इसकी जानकारी नहीं मिलती है तो ग्राहक इन प्रविष्टियों को मानने के लिए बाध्य है। ग्राहक की चूपी उसे बाद में उन प्रविष्टियों के लिए दावा प्रस्तुत करने से निवंधित करती है। बैंक ऐसे किसी तरह की प्रविष्टियों के लिए जिम्मेदार नहीं होगा जो उसके प्राधिकृत अधिकारियों के हस्ताक्षर से अधिप्रमाणित न हो । हालांकि, असाधारण परिस्थितियों में जहां कम्प्यूटरीकृत शाखाओं में पासबुक / खाता विवरण में प्रविष्टियां मैन्युअल रूप से दर्ज की जाती हैं, ऐसी प्रविष्टियां केवल तभी मान्य होंगी जब शाखा के किसी अधिकारी द्वारा अधिकृत की जाती है।

 

स्थायी निर्देश:

  • बीमा प्रीमियम, क्लबों के लिए अंशदान आदि जैसे प्रेषण के लिए स्थायी निर्देश समय-समय पर बैंक द्वारा निर्धारित शुल्कों के अध्यधीन स्वीकार किए जाएंगे। ऐसे अनुदेश ग्राहक द्वारा रद्द या खाते के बंद होने या ग्राहक की मृत्यु या किसी तरह के एकल प्रेषण के लिए शेष राशि के अपर्याप्त होने तक मान्य होंगे। यदि खाते में अपर्याप्त शेष राशि, रद्दीकरण या बैंक के नियंत्रण से परे कारणों के कारण स्थायी निर्देश पूरा नहीं किया जा सकता तो बैंक ऐसे किसी भी नुकसान के लिए ग्राहक के प्रति उत्तरदायी नहीं होगा।

 

निष्क्रिय / अपरिचालित खाता

  • यदि खाते में दो साल की अवधि के दौरान कोई लेनदेन नहीं हुआ है तो ऐसे खाते को अपरिचालित / निष्क्रिय माना जाएगा। किसी खाते को अपरिचालित खाते के रूप में वर्गीकृत करने के लिए ग्राहक के साथ-साथ तीसरे पक्ष के आग्रह पर डेबिट के साथ-साथ क्रेडिट दोनों तरह के लेन-देनों पर विचार किया जाएगा।
  • खाता के अपरिचालित / निष्क्रिय रूप में वर्गीकृत होने से कम से कम तीन महीने के पहले ग्राहक को इसके परिणामों की सूचना दी जाएगी तथा बैंक इस संबंध में एक एसएमएस / ई-मेल भेजने का प्रयास करेगा। खाता को सक्रिय करने के लिए पालन की जाने वाली प्रक्रिया को सूचित किया जाएगा और खाता अप्रचालित / निष्क्रिय खाता होने के कारण या निष्क्रिय खाते की सक्रियता के लिए किसी तरह का शुल्क नहीं लिया जाएगा।

सेवा प्रभार

  • समय –समय पर बैंक द्वारा तय किये गए सेवा प्रभार चालू खातों पर अर्ध-वार्षिक रूप से या बैंक द्वारा तय अंतराल पर लिया जाएगा। इस तरह के प्रभारों का विवरण शुल्क के टैरिफ में उपलब्ध कराया जाएगा तथा बैंक की वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराया जाएगा।

 मृतक पार्टीयों के खाते

  • व्यक्ति पृथक नामांकन सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। नामांकन (डीए – 1), रद्दीकरण (डीए – 2) और परिवर्तन (डीए – 3) दर्ज करने के लिए अनुरोध पर उपयुक्त प्रारूप उपलब्ध कराए जाते हैं।
  • मृतक जमाकर्ताओं के खातों के मामलों में, बैंक द्वारा दावे को स्वीकारने पर खाते को संचालित करने की अनुमति दी जाएगी।

ब्याज

  • चालू खाते पर किसी तरह का ब्याज नहीं दिया जाएगा।

अंतरण

खाता धारक के अनुरोध पर तथा अप्रयुक्त चेक लीफ़ों को लौटाने पर चालू खाता बिना किसी शुल्क के भारत में एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय में अंतरण किया जा सकता है।

खाता बंद करना

  • खाता धारक अपने चालू खाता को बंद कर सकता है तथा अप्रयुक्त चेक लीफ़ों के लौटाने पर बिना किसी तरह की कटौती के शेष राशि प्राप्त कर सकता है।

न्यास खाता

  • बैंक किसी भी ट्रस्ट को नहीं पहचानता है। इसका मतलब यह है कि किसी तरह कि सूचना या सूचना पट्ट पर बैंक द्वारा किसी तरह की शर्त रखने पर किसी खाते में क्रेडिट करने के लिए बैंक में जमा की गई राशि के संबंध में यह माना जाएगा कि राशि पहले जमाकर्ता की है और किसी तरह का दावा बाद में अन्य पक्ष के लिए उचित या उसपर उसका हक नहीं माना जाएगा तथा इस तरह के जमा पर किसी तरह का व्याज बैंक द्वार नहीं दिया जाएगा और ऐसा दावेदार निवारण के लिए केवल जमकर्ता पर निर्भर होगा। बैंक के विवेकानुसार, यह नियम तब तक बैंक को न्यास खाता खोलने से नहीं रोकती जब तक ऐसा खाता खोलने के समय ट्रस्ट का तथ्य स्पष्ट एवं पारदर्शी हो।

खाता धारकों का दायित्व

  • जालसाजी, धोखाधड़ी आदि को रोकने के लिए, खाता धारकों को निम्नलिखित सुरक्षा उपायों का अनुपालन करना चाहिए:
  • वे जारी चेक बुक में पन्नों की संख्या की गणना करें और यदि चेक का कोई पन्ना गायब हो तो इसकी सूचना बैंक को दें।
  • चेक बुक को सुरक्षित स्थान पर लॉक करके रखें।
  • दिनांक, प्राप्तकर्ता का नाम (चेक के मामले में) एवं रकम अमिट स्याही से स्पष्ट रूप में इस तरह से लिखे जाए ताकि किसी तरह के अन्य शब्द या अंक के अतिरिक्त जोड़ या सन्निवेश के लिए स्थान खाली न बचें।
  • कथित रूप से हस्ताक्षरित रिक्त चेक देने से बचें रहें और अन्य लोगों को अपने चेक बुक से किसी भी चेक लीफ के उपयोग की अनुमति न दें और चेक बुक के उपयोग को केवल उस खाते से निकासी के लिए सीमित रखें, जिसके लिए इसे जारी किया गया है।
  • चेक लिखते समय कार्बन पेपर का प्रयोग करें, ताकि लेखन की छाप चेक के पीछे की ओर बन जाएं।
  • नकद भुगतान की आवश्यकता न होने पर चेक को रेखांकित करें। चेक को रेखांकित इस तरह से किया जाना चाहिए ताकि चेक की पूरी चौड़ाई रेखांकित हो जाएं। सुरक्षा को और सुदृढ़ करने हेतु क्रॉसिंग के साथ “नॉट निगोशिएबल” शब्द शामिल करना होगा।
  • यह देखें कि उनके हस्ताक्षर बैंक को दिए गए नमूने हस्ताक्षर के साथ बिल्कुल मेल खाते हैं।
  • चेक या निकासी पर्ची में सभी बदलावों के लिए अपने पूर्ण हस्ताक्षर के साथ प्रमाणीकरण करें।
  • चेक ट्रंकेशन सिस्टम (सीटीएस) में प्रस्तुत चेक तिथि के अलावा किसी अन्य परिवर्तन / सुधार के साथ स्वीकार नहीं किए जाते हैं।
  • विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के तहत जमाकर्ता /ओं को बैंक को लिखित रूप में निवास स्थान में परिवर्तन को सूचित करना होगा।

 

    बैंकों को एवं बैंक से सम्प्रेषण

  • खाता धारक के पते में हर बदलाव को तुरंत बैंक को लिखित रूप से सूचित किया जाना चाहिए।
  • सभी सम्प्रेषण बैंक को संबोधित किए जाने चाहिए, न कि बैंक के किसी भी अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से।
  • बैंक सामान्य अपंजीकृत डाक के माध्यम से चेक, हुंडी/ बि‍ल की चुकौती, सूचना, पत्र इत्यादि भेजने का अधिकार सुरक्षित रखता है और बैंक के रिकॉर्ड में उसे प्रेषित होने का साक्ष्य ग्राहकों पर निर्णायक और बाध्यकारी होंगे।

 

सामान्य धारणाधि‍कार :

  • बैंक को ऐसे ग्राहकों की देयताएं को प्राप्त करने के लिए ग्राहकों की जमा राशि समायोजन करने का अधिकार है चाहे ऐसी देयताएं बैंक के किसी भी कार्यालय में वास्तविक या आकस्मिक, प्राथमिक या संपार्श्विक और कई या संयुक्त हो।

बैंक द्वारा खाता को बंद करना

  • यदि निधि के अभाव में चेक की लगातार वापसी देखी जाती है, बैंक को खाता बंद करने के लिए कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित है।

ग्राहकों की गोपनीयता

  • बैंक ग्राहक की व्यक्तिगत जानकारी को निजी और गोपनीय रूप में रखता है। केवल असाधारण मामलों में ग्राहक की जानकारी अन्य पक्ष को प्रकट की जाएगी जैसे, ए. जहां विधि की मजबूरी के तहत प्रकटीकरण किया जाता है। बी. जहां आईटी और अन्य नियमों के तहत प्रकटीकरण किया जाता है। सी. जहां बैंकिंग विनियमन अधिनियम के तहत प्रकटीकरण किया जाता है। डी. जहां जनता को प्रकट करने का कर्तव्य है। ई. जहां ग्राहक की एक स्पष्ट या निहित सहमति है। एफ़. जहां बैंक के हित में प्रकटीकरण की आवश्यकता होती है।

नामांकन सुविधा:

  • खाताधारक को नामांकन सुविधा उपलब्ध है। खाता खोलने के समय या बाद में नामांकन किया जा सकता है। इसे रद्द / परिवर्तित भी किया जा सकता है। खाते खोलने के समय, खाता धारक को नामांकन की आवश्यकता नहीं होने पर बैंक को उस समय विशेष रूप से अनुदेश देना होगा। इसी तरह खाते के विवरण में नामिती का नाम उपलब्ध कराए जाने हेतु अनुरोध किया जाना चाहिए।
  • नामांकन केवल एक व्यक्ति के पक्ष में ही करना होगा। नामांकन केवल पृथक व्यक्ति (यों) / एकमात्र स्वामित्व प्रतिष्ठान द्वारा जमा खाते के संबंध में किया जा सकता है। अगर स्वामित्व प्रतिष्ठान के गठन में बदलाव होता है, तो नामांकन रद्द कर दिया जाएगा।

नियमों को बदलने का अधिकार:

  • बैंक के पास प्रत्येक खाते धारक को अलग-अलग नोटिस दिए बिना किसी भी समय इन नियमों को बदलने या जोड़ने का अधिकार सुरक्षित है। बैंक के नोटिस बोर्ड पर लगाए गए नियमों के परिवर्तन की घोषणा पर्याप्त नोटिस के रूप में माना जाएगा।
  • एक व्यक्ति जो चालू खाता खोलता है उसे नियमों को पढ़ा, समझा जाने और वर्तमान नियमों को हटाने या किसी समय परिवर्तित करने या जोड़ा जाने से सहमत होना समझा जाएगा।

नोट : उपर्युक्त मदें प्रयोज्य कुछ सबसे महत्वपूर्ण नियमों और शर्तों (एमआईटीसी) पर प्रकाश डालता है।

( अंतिम संशोधन Sep 20, 2019 at 01:09:43 PM )